Best Fathers Day Poem Hindi from Daughter, Happy Fathers Day

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Best Fathers Day Poems Hindi

Best Fathers Day Poems Hindi


मेरे प्यारे प्यारे पापा,
मेरे दिल में रहते पापा,
मेरी छोटी सी ख़ुशी के लिए
सब कुछ सेह जाते हैं पापा,
पूरी करते हर मेरी इच्छा ,
उनके जैसा नहीं कोई अच्छा,
मम्मी मेरी जब भी डांटे,
मुझे दुलारते मेरे पापा,
मेरे प्यारे प्यारे पापा !




मैं पतंग, पापा है डोर
पढ़ा लिखा चढ़ाया आकाश की ओर,
खिली काली पकड़ आकाश की ओर,
जागो, सुनो, कन्या भ्रूण हत्यारों,
पापा सूरज की किरण का शोर,
मैं बनू इंदिरा सी, पापा मेरे नेहरू बने,
बेटियों के हत्यारों, अब तो पाप से तौबा करो,
पापा सच्चे, बेहद अच्छे, नेहरू इंदिरा से वतन भरे,
बेटियां आगे बेटो से, पापा आओ पाक एलान करो,
देवियों के देश भारत की जग में, ऊंची शान करें !




father's day poem in hindi


जाते जाते वो अपने जाने का गम दे गये…
सब बहारें ले गये रोने का मौसम दे गये…

ढूंढती है निंगाह पर अब वो कही नहीं…
अपने होने का वो मुझे कैसा भ्रम दे गये…

मुझे मेरे पापा की सूरत याद आती है…
वो तो ना रहे अपनी यादों का सितम दे गये…

एक अजीब सा सन्नाटा है आज कल मेरे घर में…
घर की दरो दिवार को उदासी पेहाम दे गये…

बदल गयी है अब तासीर, तासीरी जिन्दगी की…
तुम क्या गये आंखो में मन्जरे मातम दे गये…




Happy Fathers Day

आपकी आवाज मेरा सुकून है, 
 आपकी खामोशी, एक अनकहा संबल । 

 आपके प्यार की खुशबू जैसे, 
 महके सुगंधित चंदन। 

 आपका विश्वास,मेरा खुद पर गर्व । 
दुनिया को जीत लूं, फिर नहीं कोई हर्ज । 

 आपकी मुस्कान, मेरी ताकत, 
 हर पल का साथ, खुशनुमा एहसास 

 दुनिया में सबसे ज्यादा, 
आप ही मेरे लिए खास 

 पापा, 
आपकी शुक्रगुजार है, 
मेरी हर एक सांस .... ।।



Best Hindi Fathers Day Poems From Son

Fathers Day Poem Hindi From Son

जिन्दगी तो मेरी कट रही है आपके बाद भी…. 
मगर आप के बिन जीने में वो बात नहीं… 

उपर से तो सब मेरे अपने ही अपने है… 
मगर आप की तरह अन्दर से कोई मेरे साथ नही… 

ख्याल सब रखते है मेरा अपने तरीके से अच्छी तरह… 
म्गर अपसे जिद करने का माजा अब आता नहीं… 

लडाईयां तो अब भी होती है घर में हमारे… 
मगर आपसे वो मीठा मीठा लडने का मजा कोई दे पाता नहीं… 

मै आज भी शाम को दरवाजे पे नजरें टिकाये रहती हूं… 
आयेंगे अभी बाबा चॉकलेट और तोफे ले के मै अपने से दिल से बार बार कहती हूं… 

मगर जब देखती हूं आस आस आप नहीं होते… 
तब सच जानियें आपके ये बच्चे छिप छिप के अकेले में है बहुत रोते.. 

कोई भूल थी अगर मेरी तो एक दफा कहते मुझे… 
ऐसे अकेला छोड जाना कोई अच्छी बात नहीं…..



Father's Day Poem From Daughter

Father's Day Poem From Daughter Hindi

“कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता 
कभी धरती तो कभी आसमान है पिता 
जन्म दिया है अगर माँ ने 
जानेगा जिससे जग वो पहचान है पिता….” 

“कभी कंधे पे बिठाकर मेला दिखता है पिता… 
कभी बनके घोड़ा घुमाता है पिता… 
माँ अगर मैरों पे चलना सिखाती है… 
तो पैरों पे खड़ा होना सिखाता है पिता…..” 

“कभी रोटी तो कभी पानी है पिता… 
कभी बुढ़ापा तो कभी जवानी है पिता… 
माँ अगर है मासूम सी लोरी… 
तो कभी ना भूल पाऊंगा वो कहानी है पिता….” 

“कभी हंसी तो कभी अनुशासन है पिता… 
कभी मौन तो कभी भाषण है पिता… 
माँ अगर घर में रसोई है… 
तो चलता है जिससे घर वो राशन है पिता….” 

“कभी ख़्वाब को पूरी करने की जिम्मेदारी है पिता… 
कभी आंसुओं में छिपी लाचारी है पिता… 
माँ गर बेच सकती है जरुरत पे गहने… 
तो जो अपने को बेच दे वो व्यापारी है पिता….” 

“कभी हंसी और खुशी का मेला है पिता… 
कभी कितना तन्हा और अकेला है पिता… 
माँ तो कह देती है अपने दिल की बात… 
सब कुछ समेत के आसमान सा फैला है पिता….”




पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी 
आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी 
तुमने ही तो सिखलाया था, ये संसार तो छोटा है 
तेरे पंखों में दम है तो, नील गगन भी छोटा है 

कोई न हो जब साथ में तेरे, तू बिलकुल एकाकी है 
मत घबराना बिटिया, तेरे साथ में पप्पा बाकी हैं 

पीछे हटना, डरना-झुकना, तेरे लिए है नहीं बना 
आगे बढ़ कर सूरज छूना, तेरी आंख का है सपना 

तुझको तो सूरज से आगे, एक रस्ते पर जाना है 
मोल है क्या तेरे वजूद का दुनिया को बतलाना है 

आज तो पापा मंजिल भी है, दम भी है परवाजों में 
एक आवाज नहीं है लेकिन, इतनी सब आवाजों में  

सांझ की मेरी सैर में हम-तुम, साथ में मिल कर गाते थे 
कच्चे-पक्के अमरूदों को, संग-संग मिल कर खाते थे 
उन कदमों के निशान पापा, अब भी बिखरे यहीं-कहीं 
कार भी है, एसी भी है, पर अब सैरों में मज़ा नहीं 

कोई नहीं जो आंसू पोछें, बोले पगली सब कर लेंगे 
पापा बेटी मिलकर तो हम, सारे रस्ते सर कर लेंगे 

इतनी सारी उलझन है और पप्पा तुम भी पास नहीं 
ये बिटिया तो टूट चुकी है, अब तो कोई आस नहीं 

पर पप्पा ! तुम घबराना मत, मैं फिर भी जीत के आउंगी 
मेरे पास जो आपकी सीख है, मैं उससे ही तर जाऊंगी 

फिर से अपने आंगन में हम साथ में मिल कर गाएंगे 
देखना अपने मौज भरे दिन फिर से लौट के आएंगे



Beautiful Happy Fathers Day Poems in Hindi

happy father's day poem in hindi

यूं तो जिन्दगी मे बहुत से रिश्ते देखे है, 
पर मेरे पापा के सामने वो सारे फीके है.. 

यूं तो सब लोग कहकर भी मुकर जाते है, 
पापा वो है जो बिन कहे ही सब कर जाते है.. 

बाहर से सख्त और भीतर से नर्म होते है, 
पापा वो है जो बच्चो मे फर्क नही करते है.. 

सख्त सी आवाज के पीछे निश्छल प्यार छिपाते है पापा, 
नयी कर लो कभी खुद की फटी पुरानी जरूरते भी पापा.. 

छोटी सी नौकरी मे भी मेरी हर बड़ी ख्वाहिश पूरी करते, 
हमारी खुशी को सम्भव करने वाले ये क्या किसी जादूगर से कम होते.. 

वो न दिन देखते है न रात देखते है, 
बस हमारी जरूरतो के लिए अपनी पूरी उम्र बेच देते है.. 

मुश्किलो की कड़ी धूप खुद अकेले ही सहकर, 
सुख की ठंडी छाँव मे ही हमे देते है.. 

पिता जिंदगी का वो अटूट विश्वासरुपी धागा है, 
जो हमारे गिरने से पहले ही हाथ थाम लेते है.. 

घर का अस्तित्व और आधार जिनसे होता है, 
पिता वो है सहनशक्ति का अम्बार जिसमे होता है.. 

अप्रदर्शित अनन्त प्रेम का जो स्वरुप होता है, 
पिता का स्नेह बड़ा ही अनूठा कभी खट्टा तो कभी मीठा होता है.. 

जब कमर झुक जाती है हमारी खुशीयों की दीवार खड़ी करते करते, 
और आँखें भी बूढ़ी हो जाती है अपनी हैसियत से ज्यादा करते करते .. 

बस अब बुढ़ापे मे उनकी आशाओ को अनाथ न करना, 
अब हमारी बारी है कभी उनको निराश न करना..




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