Bal Diwas Shayari In Hindi - बाल दिवस पर कविता

Bal Diwas Shayari in Hindi Slogans On Children's Day In Hindi Bal Diwas Par Suvichar: Pandit javaharalal neharu ko bacho se bahut prem tha isaliye unake janmadin ko baal divas ke taur par manaaya jaata hai pandit javaharalal neharu ka janam 14 navambar 1889 ko uttar pradesh, ilahabad mein hua tha | bhaarat ki azadi ke baad vah pahale pradhanamantri bane | unake pita ka naam motilal neharu tha jo ki ek prakhyaat vakil the | bacho se bahut lagav hone ke karan hi unhen chaha neharu ke naam se sambodhit kiya gaya hai | neharu ji ne gandhi ji ke saath milakar desh ko svatantr karane mein bahut yogadaan diya tha. Bal Diwas Shayari in Hindi Bal Sabha Shayari Bal Sabha Ki Shayari Bal Sabha Ke Liye Shayari Bal Diwas Par Kavita Happy Children's Day In Hindi Baccho Ki Shayari In Hindi.

Bal Diwas Shayari In Hindi - बाल दिवस - Bal Diwas Par Poem in Hindi


Bal Diwas Shayari In Hindi


बच्चो के आंसू कड़वे होते हैं
उन्हें मीठा करिये
बच्चो की जिज्ञासा गहरी होती है
उसे शांत करिये
बच्चो का दुःख तीव्र होता है
इसे उससे ले लें
बच्चो का दिल कोमल होता है
इसे कठोर ना बनाएं




आज का दिन है बच्चों का,
कोमल मन का और कच्ची कलियों का,
मन के सच्चे यह प्यारे बच्चे,
चाचा नेहरू को है प्यारे बच्चे,
बाल दिवस की शुभकामनाएं।


Bal Sabha Shayari In Hindi


मैडम आज ना डांटना हमको
आज हम खेले गाएंगे
साल भर हमने किया इंतज़ार
आज हम बाल दिवस मनाएंगे




मां की कहानी थी परीयों का फसाना था,
बारिश में कागज की नाव थी,
बचपन का वो हर मौसम सुहाना था,
बाल दिवस की शुभकामनाएं।




दुनिया का सबसे अच्छा समय,
दुनिया का सबसे अच्छा दिन,
दुनिया का सबसे हसीन पल,
सिर्फ बचपन में ही मिलता है,
इसलिए आप सभी को,
बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Baccho Ki Shayari In Hindi


चाचा का है जन्मदिन,
सभी बच्चे आएंगे,
चाचा जी को फूल गुलाब से,
हम बच्चे सब महकाएँगे।




रोने की वजह ना थी,
ना हंसने का बहाना था,
क्यों हो गए हम इतने बड़े,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था,
बाल दिवस की शुभकामनाएं।




दुनिया का सबसे सच्चा समय
दुनिया का सबसे अच्छा दिन
दुनिया का सबसे हसीन पल
सिर्फ बचपन में ही मिलता है
इसलिए आप सभी को बाल दिवस की बधाई

Happy Children's Day In Hindi


फूलों के जैसे महकते रहो,
पंछी के जैसे चहकते रहो,
सूरज की भांति चमकते रहो,
तीतर के जैसे नाचते रहो,
मम्मी डैडी का आधार करो,
सुंदर भवन से मन को भरो,
यह है हमारी शुभकामनायें,
हंसते रहो मुस्कुराते रहो,
हैप्पी बाल दिवस।




बचपन के दिन भुला ना देना,
आज हंसे कल रुला ना देना,
इचक दाना -पिचक दाना, दाने उपर दाना,
कितना प्यारा था बचपन मस्ताना




बचपन है ऐसा खजाना
आता है न जो दोबारा
मुश्किल है इसको भुलाना
वो खेलना, कूदना और खाना,
मोज मस्ती में बलखाना!




फूलों के जैसे महकते रहो
पंछी के जैसे चहकते रहो
सूरज की भांति चमकते रहो
तितली के जैसे मचलते रहो
मम्मी डैडी का आदर करो
सुन्दर भावों से मन को भरो
ये है हमारी शुभ कामना
हँसते रहो, मुस्कुराते रहो
हैप्पी बाल दिवस




सबके मन को भाते चाचा नेहरू,
बच्चों को हंसाते चाचा नेहरू,
दिल के भरा अनोखा प्यार,
करते वो बच्चों को प्यार बेशुमार।
बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।!

Bal Diwas Par Kavita


बाल दिवस हैं आने वाला,
चाचा नेहरू की याद दिलाने वाला....
चाचा नेहरू को बच्चे प्यार कराते हैं,
बाल दिवस तक याद रखते हैं....
चाचा नेहरू करते थे सबसे प्यार,
सब बच्चे करते थे उनसे अच्छा व्यहार....
बाल दिवस हैं आने वाला,
चाचा नेहरू की याद दिलाने वाला ....
लेख़क: चन्दन कुमार
कक्षा : ५
अपना घर , कानपुर


Bal Diwas Shayari In Hindi 

Bal Diwas Par Poem in Hindi


चलती गाड़ी की खिड़की से
किसी अघाये यात्री ने
जैसे ही बाहर फेंकी जूठन
आधुनिकोत्तर भारत के
बच्चों की जैसे पूरी पीढ़ी
टूट पड़ी थी उस जूठन पर

लड़ती भिड़ती
गाली बकती
यह कितनी तेजाबी भाषा
जो मरोड़ती आँतों की
सुरंग से आती
और भीषण कुहराम मचाती -
बचपन के मुँह से
झरती वह
हिंसक उद्धत आहत भाषा,
वध्यस्थल से बचकर
जिन्दा रह पाने की
जीवट भाषा

वह भाषा भी किन्तु
हमारे बहरेपन की
चट्टानों से टकरा कर फिर
चाम चढ़ी पसली की
ढोलक में खो जाती

चीकट सना चीथड़ों लिपटा
निपट भयंकर
यह भी बचपन

प्राक्कथन यह
जीवन के दुःखान्त काव्य का
प्रथम पंक्ति ही जैसे
अपना अर्थ न पाकर
शब्दों का बेजान ढेर बन
रेत सरीखी बिखर गई हो।
बाल दिवस आता जाता है
यह किनका भारत महान
पीता पेप्सी पिज्जा खाता है ?
अजब खेल यह
शिशु आखेटक लकड़सुंघों का

शिशु आखेटक हाथों में
बचपन स्वदेश का
हमने तुमने सौंप दिया है,
भारी गफलत हुई
कि अब तो
लकड़सुंघो को पकड़ो भाई
लकड़सुंघों की करो धुनाई

बचपन चोरी करने वालो
बेच-बेच
अस्मिता देश की
तुमने जो कोठियाँ खड़ी कीं
उन्हीं कोठियों के बक्सों में
तुम्हें बन्द कर
जलसमाधि तुमको हम देंगे

भ्रूण हत्या के तुम अपराधी
तुमने सपनों को खा डाला
तुमने फूलों की क्यारी को
सत्ता के मद में अंधा बन

पूरी तरह कुचल ही डाला
तुम्हें किसी दुःस्वप्न की तरह
अपनी यादों से भी बाहर
करके ही
अब हम दम लेंगे।