Haryanvi Jokes in Hindi majedar chutkule



Haryanvi Jokes in Hindi majedar chutkule


एक बै एक रिश्ता होया - लड़के का बाबू घणा शरीफ था अर छोरी आळा था चालू किस्म का अर कंजूस । वो छोरे के बाबू तैं बोल्या अक चौधरी साहब, आप बारात छोटी ले कै आना (बीस-पच्चीस माणसां की) । लड़के के बाबू नै हां भर ली । जब बारात जाने का टाइम हुआ तो चालीस के करीब आदमी हो गए । लड़के के बाबू नै सोच्या अक दस-पन्द्रह तै ऊपर-तळै चाल जायां करैं, जै मैं इन्हैं टोकूंगा तै मेरा भाईचारा खराब होवैगा, सबनै चालण दे !

छोहरी के बाबू नै देख लिया कि 40 आदमी आ रहे सैं, अर खाना हमनै 20-25 का बना राख्या सै । वो कंजूस तै था ए, उसनै के करया - सारी चीजां में पानी मिलवा दिया (खीर, हलवा, आलू की सब्जी - सब में पानी मिलवा दिया) । ईब जब बरातियां नै खाना खाया, तै उन्हैं स्वाद तै आया ना, अर चुप-चाप फेरों वाली जगह आ-कै बैठ गए ।

फेरे होये पाच्छै जब बारात चालण लाग्गी, तै छोरी के बाबू नै ताना दे कै कहया - "चौधरी साहब, बारात तै छोटी ए ले कै आये आप" । ईब लड़के वाले से बरदास्त ना हुई, वो हाथ जोड़ कै न्यूं बोल्या - "चौधरी साहब, म्हारे गाम में गोबर खाण आळे बस इतणे ऐं आदमी थे" !!



एक बै बारात में भूंडू आंधा चाल्या गया । छात पै जीमणवार होण लाग्गी । घरातियां नै पत्तळ धर दिये सबकै आगै । आंधी आने का आसार था, सो सबकी पत्तळ पै एक-एक पत्थर भी धर दिया ।

भाई, म्हारे भूंडू आंधे नै समझया अक यो लाड्डू चख कै देख । उसनै पत्थर कै जोर लाया, पर वो ना फूट्या तै उसनै सोच्या अक ये लाड्डू तै किमैं बासी-से धर दिये जै फूटते भी कोनी !

छो में आ-कै उसनै पत्थर फेक कै मारा । उसकै साहमी जो दूसरा बाराती बैठ्या था, उसके सिर पै लाग्या जा-कै । उस बाराती नै मारी चिल्ली "अरै, फूट-ग्या!"

म्हारा भूंडू आंधा बोल्या "फूट-ग्या हो तै भाई, आधा मन्नैं भी दे दे" !!



गाम में ब्याह था अर बाजा बाजै था । एक छोरी आपणी मां नै न्यूं बोली...अक मां, जब यो बाजा बाजै सै तै मेरै कचकची सी ऊठैं सैं अर इसा जी करै सै जणूं फेरे ले ल्यूं ।

उसकी मां नै या बात उसके बाबू तैं बताई, अर बो बाबू बोल्या - "ठीक कहै सै, छोरी ब्याहवण जोगी हो रही सै, इसका ब्याह तगाजे तैं करांगे" ।

या बात उसका छोरा सुणै था । दस-पन्द्रह दिन पाच्छै फिर बाजा बाजै था अर वो छोरा आपणी मां नै बोल्या "मां, जब यो बाजा बाजै सै ना, तै मेरै कचकची सी ऊठैं सैं अर इसा जी करै सै जणूं फेरे ले ल्यूं" ।

उसके बाबू ने सुण ली अर न्यूं बोल्या "भाई न्यूं कर, उस ढोल आळे कै बुड़का भर ले - ईबै तेरा नम्बर ना सै" !!



एक बै एक ताऊ कै तीन छोरे थे । ताई मर-गी बीमार हो-कै, फेर ताऊ नै बड्डे छोरे का ब्याह करणा पड़-ग्या । ब्याह के वक्त पता लगा कि उस छोरी की एक और छोटी भाण थी - सो, ताऊ नै वो आपणा छोरा भी साथ ही लपेट दिया - इस तरह दोनों बेटे ब्याहे गए ।

सबतैं छोटा रह-ग्या बिन ब्याहा, उसनै भी ब्याह की जिद करी । ताऊ उसतैं न्यूं बोल्या - भाई, तेरे भाइयां का ब्याह तै छोटी उमर में कर दिया था, पर तेरा ईबै ना करां ।

छोटा छोरा भी कत्ती जवान हो रहया था, पूरा गाभरू । रिश्ते आळे आवैं तै ताऊ कह देता अक ईबै तै म्हारा सोन्नू बाळक सै, ईबै रिश्ता ना लेवां । दो-तीन साल काढ़ दिया न्यूं-ऐं ।

फिर एक दिन रिश्ते आळे आ-गे, ताऊ बोल्या - म्हारा सोनूं तै ईबै बाळक सै ।

सोन्नू नै आया छो, अर बोल्या - बाबू, ईब और के मैं रींकूंगा ?