Tuesday, 27 September 2016

haryanvi jokes in hindi 2016 Haryanvi Chutkule in Hindi



haryanvi jokes in hindi 2016 Haryanvi Chutkule in Hindi


जाट ने बनिया से उधार ले रखा था । काफी समय हो गया, बनिया ने दबाव देना शुरु किया । जाट ने कह दिया कि कल मेरे घर आ कर पूरा पैसा ब्याज समेत ले जाना ।

बनिया खुश हो कर अगले दिन सुबह जा पहुंचा जाट के घर । जाट ने सेठ को घर के अन्दर बुला लिया और बाहर खिड़की से किसी को इशारा किया । पहले ही ढ़ोल बजाने वाले बुला रखे थे, वे इशारा पाते ही ढोल बजाने लगे और जाट ने सेठ की पिटाई शुरू कर दी । पिट-पिटा कर सेठ ने कहा - "चौधरी साहब, मेरे पैसे समझो कि आ गए, पर मेरी पिटाई की बात किसी को मत बताना, नहीं तो मेरी बेइज्जती हो ज्यागी ।" जाट मान गया ।

कुछ दिन बाद जाट के पड़ौसे में किसी की शादी थी और ढोल बज रहे थे । बनिया के लड़के ने पूछा - बापू, किसका ब्याह सै "

बनिया बोल्या - बेटा, किस्सै का ब्याह कोनी, कोई बनिया पिटता होगा !!



ऐसी कहावत है कि बनियां के पास एक नहीं, 52 दिमाग होते हैं ।

पुरानी बात है । एक जाट एक दूसरे गांव के बनिया से कभी-कभी ब्याज पर पैसे लेता था और बनियां की सूदखोरी से परेशान था । एक बार जाट की 14-15 साल की लड़की का बीमारी से देहान्त हो गया और जाट को सेठजी से कुछ और कर्ज लेना पड़ा ।

फिर हुआ यूं कि कुछ दिन बाद बनियां की लड़की, जिसका नाम “परमेसरी” था और जो लगभग उसी उम्र (14-15 साल) की थी, वो भी महामारी के कारण चल बसी । उसकी 13वीं के दिन जाट शोक प्रकट करने के लिए उस सेठ के घर चला गया ।

उस समय बनियां घर में नहीं था । सेठानी भोली-भाली थी - जाट ने उसको एक तरफ ले जा कर कहा : "सेठानी जी, मैं तो अपनी लड़की से कल स्वर्ग में मिलने गया था, वो तो अब मौज में है पर परमेसरी बेचारी परेशान है । वो कह रही थी कि वो अपने जेवर तो धरती पर ही छोड़ आई और उसकी दूसरी सहेलियां सजी-संवरी घूमती हैं - और मेरे को यह कहने लगी, कि मेरी मां से कह देना कि मेरे जेवर भिजवा दे । अगर आप उसके जेवर मुझे दे दें तो मैं अगली बार वहां उसके पास पहुंचा दूंगा" ।

बेचारी सेठानी ने जाट को जेवर दे दिये और जाट उसको राम राम कहकर अपने गांव की तरफ पैदल चलता बना । थोड़ी देर के बाद जब बनिया घर आया तो सेठानी ने सारा किस्सा बता दिया । बनियां समझ गया कि चौधरी तो सेठानी का उल्लू बना गया और अपनी घोड़ी पर सवार होकर उसी तरफ भागा । बनियां को घोड़ी पर आता देखकर जाट खेतों की तरफ भाग गया और एक पेड़ पर चढ़ गया । बनियां ने घोड़ी पेड़ के नीचे रोक ली और जाट से जेवर मांगे । जाट ने जवाब दिया : “सेठ जी, मैने कोई चोरी तो की नहीं है, सेठानी ने अपने आप ये जेवर मुझे दिये हैं । अगर आप इस पेड़ पर चढ़ सकते हो तो ऊपर आकर अपने जेवर ले जाओ” ।

बनियां बेचारा जोर लगाकर पेड़ पर तो चढ़ गया पर बुरी तरह थक गया । मौका देखकर जाट ने नीचे खड़ी हुई उसकी घोड़ी पर छलांग लाई और घोड़ी को लेकर भागने लगा ।

बनियां ने देख लिया कि अब तो घोड़ी भी हाथ से गई - फिर सोचा कि जाट के हाथों अपना अपमान करवाने की बजाय क्यों ना कुछ पुण्य ही कमा लिया जाये !

बनियां ने जोर से आवाज दी : "अड़ चौधड़ी - या घोड़ी परमेसरी ताहीं दे दिये और उस-तैं बता दिये कि तेरी मां नै तै जेवर भेजे सैं और बाप नै घोड़ी ।"

बाद में बनिया दूसरों को बताने लगा : बावन-बुद्धि बाणियां, तिरेपन-बुद्धि जाट !!




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