Haryanvi Chutkule haryanavi joke in hindi haryanavi chutkule


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एक बै रामफळ धरमबीर तैं बोल्या - चार इसे शहरां के नाम बता जो "पत" पै खतम होते हों ।

धरमबीर लाग्या आंगळियां पै गिणन अर बोल्या - सोनीपत, पानीपत, बाघपत अर खरखौदा ।

रामफळ चक्कर में पड़-ग्या, बोल्या - भाई, बात समझ में कोन्यां आई, खोल कै बता - यो खरखौदा क्यूकर भला ?

धरमबीर बोल्या - "रै, उड़ै रामपत ब्याह राख्या सै" !!




चालीस साल का बदले गाळ में जावै था, एक ऊत सा बाळक बोल्या - ताऊ, राम-राम ।

बदले नै "ताऊ" कहलवाना कुछ आच्छया-सा ना लाग्या, उसनै कोई जवाब ना दिया अर आगे-नै लिकड़ लिया ।

आगलै दिन वो छोरा फिर बोल्या - ताऊ राम-राम । बदले तैं ना रहया गया अर उस छोरे तैं बोल्या - छोरे, तू मन्नै "काका" नहीं कह दे ?

छोरा बोल्या - "काका" कह दूंगा तै के हो ज्यागा ?

बदले बोल्या - जै तू मन्नै "काका" कह देगा तै मैं तेरी मां की बगल में चूल्हे धोरै बैठ कै गर्मा-गर्म रोटी खा लूंगा ।

छोरा बोल्या "ले तै, फिर तन्नै मैं "मामा" कह दूं सूं - चूल्हे धोरै बैठ कै, तवे पर-तैं आप्पै तार-कै कत्ती तात्ती-तात्ती रोटी खा लिये"!!



बदलू की भैंस उसकी मां कै हाथळ* थी । एक बै मां नै एक जरूरी काम खातिर आपणै घरां जाणा पड़-ग्या । वा बदलू तैं बोल्ली अक जब धार काढ़ण का टाइम हो तै आपणी बहू नै मेरा सूट पहरा कै ले जाइये ।

सांझ के टाइम बदलू की बहू उसकी मां का सूट पहर कै भैंस कै नीचै बैठ गई अर बदलू खोर में चून (आटा) मिलावण लाग-ग्या ।

जब बदलू की बहू नै भैंस के थणां कै हाथ लाया, तै भैंस पाच्छे नै मुड़ कै देखण लाग्गी । बदलू बोल्या - "के देखै सै बावळी - (धार) काढ़ लेण दे, या मेरी ए मां सै" !!
हाथळ* - गाय या भैंस को एक ही आदमी या औरत से धार कढवाने (दूध दुहने) की आदत हो जाती है । ऐसी गाय/भैंस किसी दूसरे को दूध निकालने नहीं देती और उसे लात मारती है । इस को हरयाणवी में कहते हैं - "हाथळ होना" ।



धीरे की बहू बखत तैं पहल्यां राम नै प्यारी हो-गी । उसका नादान बेटा सूंडू बूझण लाग्या - "बाबू, मेरी मां कित गई ?

धीरे - बेटा, तेरी मां राम नै प्यारी हो-गी, उसनै राम ले-ग्या ।

सून्डू - बाबू, मेरी मां नै राम क्यूं ले-ग्या ?

धीरे - बेटा, तेरी मां राम के तै किसै काम की ना । उसनै मेरी गृहस्थी उजाड़नी थी, वा उजाड़ दी - बाकी उसनै कोए मतलब ना !