haryanavi jokes in hindi language Funny Haryanvi Jatt



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सुरते की सास घणी कंजूस थी । वो जब भी ससुराल जाता तो उसकी सास प्याज और चटनी रख देती और चटनी में घणी मिर्च होया करती । सुरते जिस जगह खाना खाने बैठता था, उसके पास एक खांड की बोरी भरी रखी थी ।

एक बै उसका मुंह घणा कसूता जळ-ग्या और वो खांड की बोरी की तरफ हाथ करके अपनी सास से बोला - "सासू जी, चवन्नी की (खांड) मोल ए दे दे !"



एक गाभरू छोरा अपनी ससुराड़ गया । सुसराड़ के ठाठ देख कै उसनै सोच्या अक दो-चार दिन और ठहर ल्यूं ।

कई दिन पाच्छै उसके सुसरे नै पड़ौस की कई छोरी बुलाई अर बोल्या - ए छोरियो, इस मलंग नै डिगाओ हाड़े तैं, यो तै कत्ती-ए चिप-ग्या । आगलै दिन दोफाहरी में मलंग रोट खा कै ठाठ तैं सोवै था । उसकी साळी कहण लागी - जीजा, खड़ा हो ले, रेल का टाइम हो रहया सै ।

उसकी माड़ी-माड़ी आंख खुल्ली अर बोल्या - क्यूं रौळा कर रही सो, सोवण दो नै । वे फिर बोल्ली - जीजा, खाट छोड-कै उठ, रेल का टाइम हो रहया सै ।

मलंग नै जवाब दिया - "रेल चली जागी तै जाण दो - मेरी खाट के रेल की पटड़ी पै घाल राक्खी सै ?"





एक बै एक छोरा आपणी सुसराड़ चाल्या गया आपनी रूस्सी ओड़ बहू नै ल्यावण ।

उसकी सासू न्यूं बोल्ली समझावण खातिर - बेटा, हाम थे जो तू बयाह दिया, ना तै तू इस लायक ना था ।

छोरा बोल्या - हाँ सासू जी, म्हारे खानदान में कदे मेरा बाबू ब्याहा गया ना, मेरा दादा ब्याहा गया ना । तमनै या बड़ी मेहरबानी करी अक मैं ब्याह दिया !!



एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड गई। गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..पुछिये बहू नै…..क्यूं तंग पा री सै..?

गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।

गादड छो में भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उन्हें जा कै। अकड में गादड ने बिल तै मुंह बाहर काढा तै दोनूं कुत्तां नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्तां के मुंह में ही रह गये। भीतर दूसरी गादडी ने गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?

गीदड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!