haryanavi joke in hindi haryanavi chutkule



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एक छोरा क्लास में घणा बोल्या करता । उसका मास्टर बोल्या - रै छोरे, तेरै या बीमारी कित्तैं लाग्गी ?

छोरा बोल्या - जी या तै खानदानी सै । मेरा दादा वकील था अर मेरा बाबू मास्टर, उनकै भी या बीमारी थी ।

मास्टर बोल्या - अरै, तेरी मां तै ठीक-ठाक होगी ?

छोरे नै जवाब दिया - "जी, वा तै औरत सै" !!



ढोल्लू अर मौलड़ स्कूल में पढ़्या करते । एक दिन ढ़ोल्लू बोल्या - भाई मौलड़, दुर्घटना अर बदकिस्मती में के फरक सै ?

मौलड़ बोल्या - देख भाई, जै आपणे स्कूल में आग लाग ज्या, तै आपणी या दुर्घटना सै । अर जै आग बुझावण आळे आ-कै आपणे मास्टर नै बचा लें, तै आपणी बदकिस्मती सै !!



मास्टर जी नै बाळकां तैं हुक्म दिया अक बैठी हुई गावड़ी (गाय) का चित्र बनाओ । एक छोरे नै खड़ी हुई गाय का चित्र बना कै दिखा दिया ।

मास्टर जी नै डंडा उठाया अर बोल्या - मन्नै तै बैठी गावड़ी की तसवीर बणावन की कही थी ।

छोरा बोल्या - "मास्टर जी, मन्नै तै बैठी ए बणाई थी, आपका डंडा देख कै खड़ी हो-गी" !!



गाम के दो छोरे कालिज में पढ़्या करते । एक दिन घणी गरमी थी, वे दोनूं पसीने से तर-बतर हो गये अर एक चाय की दुकान के बाहर अपनी साइकिल खड़ी कर कै दुकान कै भीतर जाकर बैठ-गे । दुकान वाले को आर्डर दिया -

"भाई लाला जी, पंखा तेज कर दे । बॉबी फिल्म का गाणा चाल रहया सै, रेडियो की आवाज तेज कर दे । और सुण, एक कप चाय बना दे, अर एक-बटा-दो कर-कै दो कप्पां (cups) में डाल-कै ले आ । चाय में पानी कम, पत्ती भी कम - चीनी अर दूध ज्यादा डालिये । अर सुण, बाहर म्हारी साइकिल खड़ी सैं, उनका ध्यान राखिये ।"