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एक बै लाल बत्ती पै एक मेम साहब की कार खराब हो गई । कार सड़क के बीच में खड़ी रही, ना आगे गई और ना पीछे हटी । ट्रैफिक पुलिस में जिस जाट भाई की ड्यूटी थी, वो

आ कै बोल्या - "मैडम, के बात सै, आप नै बत्ती का कोए भी रंग पसन्द ना आया ?"



एक बै एक कोर्ट में एक जाट-जाटणी के तलाक के केस की सुनवाई चल रही थी । उसमें जज साहिबा भी एक लुगाई थी । जज साहिबा ने जाट से पूछा - आप अपनी पत्‍नी को क्यूं

छोड़ना चाहते हो ?

जाट बोल्या - जी, मैं तै नां छोड़ना चाहता इसनै, या-ए मन्नै छोडना चाहवै सै ।

फिर जज साहिबा ने जाटणी से पूछा - तू अपने पति के साथ क्यूं नहीं रहना चाहती ?

जाटणी बोल्ली - "एक हफ्ता तू रह-कै देख ले इस धोरै, तन्नै आप्पै बेरा पाट ज्यागा !!"



एक छोरा पुलिस तैं घणा डरै था । एक बै वो कितै जावै था, साहमी पुलिस आती दीख-गी अर वो खेतां कानी भाज्या - पुलिस भी उसकै पाछै भाजण लागी ।

छोरा एक कीकर पै चढ़ कै बैठ-ग्या । पुलिस हवलदार बोल्या - अरै ऊपर के करै सै ? छोरा डरता-डरता बोल्या - जी, निंबोळी खाऊँ सूं । हवलदार नै फिर बूझी - अरै, कीकर पै के

निंबोळी लागैं सैं ।

छोरा बोल्या - जी, डरते नै एकाधी पा ए जा सै !!





चौटाळा का राज था, एक बै दो कत्ती देसी माणस रोहतक शहर में चले गए । सारे कै घूमे अर देखते रहे, कुछ समझ में ना आया ।

जब वे एक भीड़ आळी जगह में गए तै एक बोल्या - "किमैं ना राज-रूज !"

इतने में एक पुलिस आळा आया अर उसके पाच्छे पै खींच कै लठ मारया । वो पाच्छे नै देख कै बोल्या - ना भाई, राज का तै धर्राटा ऊठ रहया सै !