Funny Haryanvi Jokes in Hindi Humorous Jokes in Haryanavi



Funny Haryanvi Jokes in Hindi Humorous Jokes in Haryanavi


एक जाट नै पेपर में किम्मे नी आवे था अररर अगला छोरा (बनिया) जमा जुटा पड़ा लिखण में;
जाट: भाई मन्ने भी दिखा दे किम्मे।
बनिया: मन्ने भी कोनी आंदा।
जाट: फेर इसा तावला तावला के तेरी बुआ का कन्यादान लिखे है?



एक बार एक हरियाणवी अंग्रेजी सीखण विदेश म्है गया। एक साल पाछै वो वापस हरियाणा आया। 2-3 दिन पाछै उस धोरे फ़ोन आया और फ़ोन पे एक आदमी बोल्या, “मखा राम राम, क कमा रया सै, और सुना किम्मे गाम की।”
हरियाणवी: Who is speaking?
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फ़ोन आला आदमी: रै झकोई पिछाणया कोणी के? मैं बोलू सु Anderson!



छोरा: माँ, एक बात बूझू?
माँ: हाँ बूझ।
छोरा: मैं गोद लिया था के?
माँ: बेटा गोद ए लेते… तो सुथरा सा न लेते।

हरियाणवी लड़का

एक लुगाई ने हरियाणवी लड़के से पूछा: अरे बेटा तेरा ब्याह हो लिया के?.

हरियाणवी लड़का: ना ताई मैं तो न्युंए दुखी हूँ।



एक जाट दिल्ली पहुँचा तो रेलवे स्टेशन पै अखबार वाले से बोला,
“एक अखबार देना।”
अखबार वाला: हिन्दी या अंग्रेजी का।
जाट:भाई कोई सा भी दे दे, मने तो रोटी ही लपेटनी है।



शिवजी ने जब जाट बनाया तो उसे सब कुछ दिया। तेज़ दिमाग़, लंबा चौड़ा शरीर, लेकिन ज़ुबान ना दी, तो पार्वती बोली, “प्रभु आपने कितना सुथरा आदमी बनाया है ये जाट, इसे भी ज़ुबान दे दो ताकि यह भी बोल सके।”
शिवजी बोले, “ना पार्वती यह बिना ज़ुबान के ही ठीक है।”
लेकिन पार्वती ना मानी शिवजी के पैर पकड़ लिए पार्वती की ज़िद के चलते शिवजी ने जाट को ज़ुबान दे दी। ज़ुबान मिलते ही जाट बोला, “रे शिवजी, या सुथरी सी लुगाई कित त मारी?”