PAPU & TEACHER









अध्यापिका पप्पू से: तुम इतने परेशान क्यों हो?

पप्पू ने कोई जवाब नहीं दिया।

अध्यापिका: क्या हुआ, क्या तुम अपना पेन भूल आये हो?

पप्पू फिर चुप।

अध्यापिका ने फिर से सवाल किया: रोल नंबर भूल गए हो?

पप्पू इस बार भी चुप।

अध्यापिका फिर से: हुआ क्या है, कुछ तो बताओ क्या भूल गए?

पप्पू गुस्से से: ओये! चुप कर मेरी माँ, यहाँ मैं पर्ची गलत ले आया हूँ और तुझे पेन-पेंसिल और रोल नंबर की पड़ी हुई है।



एक बार एक स्कूल मास्टर ने अपनी क्लास के बच्चों से पूछा, "

बच्चों, जिस तरह आज 20-20 क्रिकेट आने से क्रिकेट का मज़ा बढ़ गया है,

उसी तरह अगर तुम्हारी परीक्षाओं का तरीक़ा भी बदल दिया जाए तो 

किस तरह इन परीक्षाओं को ज़्यादा से ज़्यादा रोमांचक बनाया जा सकता है?"

सारे बच्चे चुप। किसी को कोई जवाब नहीं सूझा। 

जब काफ़ी देर तक कोई नहीं बोला तो पप्पू इस सवाल का जवाब देने के लिए खड़ा हो गया। 

मास्टर जी उसके ख़ुराफ़ाती दिमाग़ को जानते थे। 

एक बार तो उन्होंने आंखें तरेरीं और न चाहते हुए भी बोले, "अच्छा जल्दी से बताओ क्या सुझाव देना चाहते हो?"

पप्पू गम्भीर होकर बोला, "मास्टरजी हमारा पेपर एक घंटा 20 मिनट का होना चाहिए।"

मास्टर जी: और क्या कहना चाहते हो?

पप्पू: हर बीस मिनट के बाद छात्रों को आपस में बातें करने के लिए दो मिनट का "स्ट्रेटेजिक टाइम आउट" मिलना चाहिए।

मास्टर जी: और बोलो?

पप्पू: बच्चों को परीक्षा के दौरान एक "Free Hit" भी मिलनी चाहिए, जिसमें बच्चे किसी भी एक सवाल का उत्तर अपनी मर्ज़ी से लिख सकें।

मास्टर जी: और?

पप्पू: पहले 20 मिनट में "पॉवर प्ले" होना चाहिए जिसमें ड्यूटी वाला मास्टर कमरे से बाहर रहे।

मास्टर जी: बहुत अच्छे! और क्या चाहते हो?

पप्पू: और हर 20 मिनट बाद "चीयर लीडर्स" कमरे में आकर 02 मिनट तक डान्स प्रस्तुत करें।

यह सुनते ही मास्टर जी बेहोश हो गए पर क्लास के सभी बच्चों ने पप्पू को कंधों पर बैठा लिया और नाचने लगे।



संस्कृत की क्लास मे गुरूजी ने पूछा, "पप्पू, इस श्लोक का अर्थ बताओ। 

'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"

पप्पू: राधिका शायद रस्ते में फल बेचने का काम कर रही है।

गुरू जी: मूर्ख, ये अर्थ नही होता है। चल इसका अर्थ बता, 

'बहुनि मे व्यतीतानि, जन्मानि तव चार्जुन'।

पप्पू: मेरी बहू के कई बच्चे पैदा हो चुके हैं, सभी का जन्म चार जून को हुआ है।

गुरू जी: अरे गधे, संस्कृत पढता है कि घास चरता है। अब इसका अर्थ बता, 

'दक्षिणे लक्ष्मणोयस्य वामे तू जनकात्मजा'।

पप्पू: दक्षिण में खडे होकर लक्ष्मण बोला जनक आज कल तो तू बहुत मजे में है।

गुरू जी :अरे पागल, तुझे 1 भी श्लोक का अर्थ नही मालूम है क्या?

पप्पू: मालूम है ना।

गुरु जी: तो आखिरी बार पूछता हूँ इस श्लोक का सही सही अर्थ बताना, 

'हे पार्थ त्वया चापि मम चापि!' क्या अर्थ है जल्दी से बता?

पप्पू: महाभारत के युद्ध मे श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से कह रहे हैं कि...

गुरू जी उत्साहित होकर बीच में ही कहते हैं, "हाँ, शाबाश, बता क्या कहा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से?

पप्पू: भगवान बोले, 'अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे'।

गुरू जी बेहोश!



एक बार एक शिक्षक ने क्लास में बच्चों से एक सवाल पूछा।

शिक्षक: बच्चों अगर तुम देखो की तुम्हारे स्कूल के सामने एक बदमाश बम रख कर जा रहा है तो तुम क्या करोगे?

शिक्षक का सवाल सुन कर बच्चे एक दूसरे का मुंह ताकने लगे पर जवाब किसी को नहीं सुझा,

तो आखिरी बेंच पर शिक्षक ने देखा की पप्पू बैठा हुआ मुस्कुरा रहा है।

पप्पू को मुस्कुराता हुआ देख कर शिक्षक ने उस से पूछा, "बेटा पप्पू क्या तुम जवाब जानते हो"?

पप्पू: जी मास्टरजी जवाब तो मेरे पास है पर मैं बताउंगा नहीं क्योंकि उसके बाद आप मुझे मारोगे।

शिक्षक: नहीं बेटा नहीं मारूंगा तुम जवाब बताओ।

पप्पू: मास्टरजी पहले तो हम कुछ देर इंतज़ार करेंगे कि पुलिस आकर उस बम को निष्क्रिया कर दे

और अगर पुलिस नहीं आयी तो हम चुपचाप वह बम लाकर स्टाफ रूम में रख देंगे।